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12th Political Science Complete Notes

  📘 Part A: Contemporary World Politics (समकालीन विश्व राजनीति) The Cold War Era (शीत युद्ध का दौर) The End of Bipolarity (द्विध्रुवीयता का अंत) US Hegemony in World Politics ( विश्व राजनीति में अमेरिकी वर्चस्व ) Alternative Centres of Power ( शक्ति के वैकल्पिक केंद्र ) Contemporary South Asia ( समकालीन दक्षिण एशिया ) International Organizations ( अंतर्राष्ट्रीय संगठन ) Security in the Contemporary World ( समकालीन विश्व में सुरक्षा ) Environment and Natural Resources ( पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन ) Globalisation ( वैश्वीकरण ) 📘 Part B: Politics in India Since Independence (स्वतंत्रता के बाद भारत में राजनीति) Challenges of Nation-Building (राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ) Era of One-Party Dominance (एक-दलीय प्रभुत्व का युग) Politics of Planned Development (नियोजित विकास की राजनीति) India’s External Relations (भारत के विदेश संबंध) Challenges to and Restoration of the Congress System ( कांग्रेस प्रणाली की चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना ) The Crisis of Democratic...

3 Challenges before India at the time of independence

असंभव सा मिलन: तीन परीक्षाएँ जिन्होंने आधुनिक भारत के जन्म को परिभाषित किया 15 अगस्त 1947 का सूर्य केवल औपनिवेशिक दासता से मुक्ति का सवेरा नहीं था, बल्कि यह मानव इतिहास के सबसे साहसिक और अभूतपूर्व राष्ट्र-निर्माण प्रयोग का प्रारंभ था। स्वतंत्रता के उस संक्रमणकालीन दौर में पश्चिमी विश्लेषकों और औपनिवेशिक विचारकों का दृढ़ अनुमान था कि भाषाई, धार्मिक, और क्षेत्रीय विविधताओं के बोझ तले दबा यह नवनिर्मित राष्ट्र जल्द ही गृहयुद्ध और विखंडन की बलि चढ़ जाएगा। भारत के समक्ष चुनौती केवल एक नई सरकार के गठन की नहीं थी, बल्कि एक बहुलवादी समाज को बिना उसकी विशिष्टताओं को नष्ट किए, एक अखंड और आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में ढालने की थी। आधुनिक भारत का यह अस्तित्वपरक संघर्ष मुख्य रूप से तीन मौलिक परीक्षाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा: विविधता के बीच एकता का निर्माण, संस्थागत लोकतांत्रिक संस्कृति की स्थापना, तथा समावेशी विकास के साथ अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा। राष्ट्रीय निर्माण की पहली अग्निपरीक्षा 'विविधता के बीच एकता' को सिद्ध करने की थी। सैकड़ों भाषाएँ, विभिन्न पंथ, प्रांतीय भिन्नताएँ और 5...

12th Political Science Notes : Rashtra Nirman Ki Chunautiya

  अध्याय-1 : राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ सारांश : भारत ने 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त की (नोट: मूल में 14 अगस्त लिखा है, लेकिन सही तिथि 15 अगस्त है—आधी रात को स्वतंत्रता मिली)। जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में प्रसिद्ध भाषण “Tryst with Destiny” (नियति से मिलन) दिया, जिसमें उन्होंने गरीबी, असमानता और अज्ञानता को दूर करने तथा स्वतंत्रता व सशक्तिकरण के माध्यम से एक लोकतांत्रिक और प्रगतिशील भारत बनाने का संकल्प व्यक्त किया। रोचक तथ्य: यह भाषण रेडियो पर प्रसारित हुआ था और आज यूट्यूब पर इसके लाखों व्यूज़ हैं। स्वतंत्र भारत की प्रमुख चुनौतियाँ : राष्ट्र-निर्माण → 500+ रियासतों को एक राष्ट्र में जोड़ना और विविधताओं को समाहित करना। उदाहरण: जैसे कोई जिग्सॉ पज़ल जोड़ना। लोकतंत्र की स्थापना → संविधान लागू करना (जिसे बनाने में 2 साल 11 महीने 18 दिन लगे) और लोकतांत्रिक व्यवस्था खड़ी करना। सामाजिक-आर्थिक विकास → गरीबों व हाशिए पर खड़े वर्गों (दलित, आदिवासी) का उत्थान करना। नोट: आज भी आरक्षण पर बहस जारी है। विभाजन की चुनौतियाँ : भारत और पाकिस्तान का विभाजन...

12th Political Science Question Bank

 # Question Bank ## Subject: Political Science ## Class: 12th ## Year: 2025-26 --- #### Chapter 1: The End of Bipolarity (Contemporary World Politics) 1. Select the correct option and write:      (i) Where did the Socialist Revolution take place?         (a) In Russia         (b) In France         (c) In Japan         (d) In England      (ii) On which system was the Soviet system’s economy based?         (a) Capitalist economy         (b) Socialist economy         (c) Mixed economy         (d) None of the above      (iii) When did the disintegration of the Soviet Union occur?         (a) 25 December 1991         (b) 06 December 1992         (c) 4 Novemb...

12th Political Science Important Quotations

### अध्याय-1: राष्ट्र निर्माण की चुनौतियाँ #### सारांश: भारत ने 15 अगस्त, 1947 को (नोट: मूल में 14 अगस्त लिखा है, लेकिन सही तिथि 15 अगस्त है—आधी रात को स्वतंत्रता मिली) स्वतंत्रता प्राप्त की। स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उस रात संविधान सभा के एक विशेष सत्र को संबोधित किया। यह भाषण "ट्रिस्ट विद डेस्टिनी" के रूप में प्रसिद्ध है, जिसमें उन्होंने कहा: "लंबे वर्षों पहले हमने भाग्य से एक ट्रिस्ट बनाया था, और अब समय आ गया है जब हम अपनी प्रतिज्ञा को पूरी तरह से या पूर्ण रूप से भुनाएं।" उनका मुख्य संबोधन था कि स्वतंत्रता और सशक्तिकरण के माध्यम से, हमारी जिम्मेदारी है कि भारत में हर इंसान की गरीबी, असमानता और अज्ञानता को समाप्त करें, भारत का लोकतांत्रिक और प्रगतिशील राज्य निर्माण करें, जीवन की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक संस्थानों का निर्माण करें। *रुचिकर तथ्य:* नेहरू का यह भाषण रेडियो पर प्रसारित हुआ और दुनिया भर में लाखों लोगों ने सुना, जो भारत की स्वतंत्रता को वैश्विक घटना बनाता है। आज भी यह भाषण TED टॉक्स की तरह प्रेरणा...

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